कोषाध्यक्ष महोदय ने कहा कि - गुरू बिना ज्ञान नहीं। ज्ञान बिना भविष्य नहीं। यदि भविष्य को बनाना है या सवांरना है तो गुरू द्वारा दिये गये ज्ञान को अपने जीवन में उतारना चाहिए। श्री महालक्ष्मी के सभी विद्यार्थियों के लिए मेरा छोटा सा संबोधन “अच्छी संगति को + करो। बुरी संगति को - करो। अच्छे व्यवहार को × करो। गलतियों को ÷ करो।“